साईनाथ तेरे हजारों हाथ अध्याय 1

साई नाथ तेरे हजारों हाथ अध्याय 1

साईनाथ तेरे हजारों हाथ अध्याय 1

आज साईं नाथ का नाम करोड़ों दिलों में है ।कोई उन्हें अपना माता-पिता समझता है और कोई उन्हें अपना मित्र जो अपने भक्तों को अंधेरों में रास्ता दिखाता है। साईनाथ तेरे हजारों हाथ अध्याय 1 में मैं आपको इस आर्टिकल के जरिए साईनाथ कैसे शिर्डी पहुंचे वहां से आरंभ कर रही हूं।

साईनाथ तेरे हजारों हाथ अध्याय 1

 

शिरडी गांव के हवाओं में  आज भी साईं का नाम और उनकी यादें वैसे ही है ।वहां के माहौल में जहां भक्त लोग बिना कोई भेदभाव एक दूसरे का साथ देते हैं और साईं भक्ति करते हैं।

लनडी बाग, द्वारकामाई ,खंडोबा टेंपल ,चावड़ी जब भी लोग साईं नाथ की आरती करते हैं तो इन इमारतों में एक जान सी आ जाती है। ऐसा लगता है कि साईनाथ हमारे साथ ही हैं।

लगभग १५० साल पहले इन इमारतों और वहां के लोगों ने साईनाथ को पहचाना।

चलिए जानते हैं कि साईनाथ ने शिर्डी में कदम कब रखा और साईनाथ को वहां क्यों जाना पड़ा।

खंडोबा टेंपल में महालसपति नाम के व्यक्ति पुजारी थे। हर गुरुवार baija  खंडोबा महाराज की लिए प्रसाद बनाकर लेकर जाती थी।

एक  गुरुवार baija को प्रसाद तैयार करने में देरी हो क्योंकि baija late उठी थी। उस दिन baija अपने सपने में एक शिशु को देखती हैं। जब baija को उनके घर के सदस्य baija  आवाज देते हैं तो वह जाग जाती है।

बातों ही बातों में baija अपने सपने का जिक्र अपने पति के साथ करती हैं। उनकी बातें सुनकर उनके पति कहते हैं । जरूर मैंने अपने पिछले जन्म में कोई पाप किया होगा पर तुम खंडोबा जी से जरूर पूछना कि तुम्हें किस बात की सजा मिल रही है ?

जो आज तक तुम कोई बच्चे को जन्म नहीं दे पाई।Baija मुस्कुरा कर कहती है मुझे नहीं मालूम कि उस सपने का क्या मतलब है ?

फिर उनके पति ने कहा जरूर कोई मकसद होगा तभी तुम्हें वह सपना आया।  इतनी बातचीत के बाद baija खंडोबा जी के लिए प्रसाद लेकर अपने घर से निकलती है और रास्ते में सभी लोगों का हाल-चाल भी पूछती है।

खंडोबा मंदिर का पुजारी अपने आप से बात करता है कि ऐसा क्या हुआ होगा जो अभी तक baija नहीं पहुंची।

 

इतने में महालसपति एक तपस्वी को देखते हैं। वह खंडोबा का प्रसाद उस बाल योगी को भी देने की कोशिश करते हैं। बाल योगी तपस्वी अपनी साधना में इस तरह से लीन था कि महालसपति की आवाज उन्हें सुनाई ही नहीं दी।

महालसपति ने सोचा कि वहां प्रसाद को उस तपस्वी के सम्मान में रख देता हूं ।जब वह तपस्वी अपनी साधना से जागेगा तब वह प्रसाद ग्रहण कर लेगा।

जब महालसपति ने उस तपस्वी की पोटली खोली तो हैरान रह गए क्योंकि ना ही उसमें कपड़े या खाने का पदार्थ था ना ही कोई अनमोल वस्तु। उसमें सिर्फ एक ईट थी। जैसे ही महालसापति ने  ईट को  पकड़ा ।वह उस ईट को ज्यादा देर तक नहीं पकड़ पाए और उनके हाथ से गिरने पर उस तपस्वी ने उस ईट को अपने हाथ में पकड़ लिया। महालसपति और उस तपस्वी के बीच वार्तालाप हुई।

इतने में baija सामने से आ गई और कहा कि पहला बार ऐसा हुआ है कि मैं खंडोबा का प्रसाद बनाने में लेट हो गई और उनकी नजर उस तपस्वी पर पड़ी । baija ने कहा कि यह बालक कौन है🤔?

उनका तपस्वी रूप देखकर baija को उस शिशु की याद आ गई जो उन्होंने अपने सपने में देखा था। साईं नाथ ने baija को कहा कि क्या देख रही हो baija maa

जब बाल योगी ने baija को मां कहा तो उनकी अंदर बैठी हुई ममता उभरकर सामने आ जाती है और वह उसी क्षण उस बाल योगी को अपने बच्चे के रूप में स्वीकार कर लेती है।

महालसपति हैरान हो जाते हैं कि उस बाल योगी ने baija को उनके नाम से कैसे जाना?

Baija कहती हैं कि मुझे सिर्फ इतना मालूम है कि इस बाल योगी ने मुझे मां कहा।

तुम जो भी हो एक ही क्षण में तुम्हें मुझे मां का सुख दे दिया।

साई नाथ तेरे हजारों हाथ अध्याय 1

साई नाथ तेरे हजारों हाथ अध्याय 1

साई नाथ तेरे हजारों हाथ अध्याय 1

एक गांव के व्यक्ति ने महालसपति को कहा कि यह बाल योगी कौन है ?महालसपति ने उत्तर दिया कि यहां एक योगी है और आज ही शिर्डी में आए हैं।

Baija ने कहा तुमने मुझे मां कहा है तो मां के घर तुम नहीं आओगे। बाल योगी कहते हैं मेरा पूरा संसार इस वृक्ष के नीचे ही है मां.…इसी के छाव को पाने के लिए मैं यहां आया हूं।

Baija ने जो खंडोबा का प्रसाद बनाया था वह इस बार योगी को खिलाना चाहती थी फिर महालसपति कहते हैं आप खंडोबा जी को क्या भोग लगाएंगे ?

मां कहती हैं कि मैं खंडोबा जी के लिए फिर से प्रसाद बना दूंगी। बाल योगी वह प्रसाद स्वीकार करते है जैसे ही वह खाने लगते है   बाल योगी एक कुत्ते को देखते हैं और प्रसाद उसे भी दे देते हैं।

यह देखते हुए कुछ लोग इस बात का विरोध करने लगते हैं कि खंडोबा का प्रसाद तुम यह कुत्ते को कैसे खिला सकते हो?

उनका कहना है कि खंडोबा जी का प्रसाद तुम कुत्ते को खिला रहे हो तो इसका मतलब है कि तुम खंडोबा का निरादर कर रहे हो। हम ऐसा नहीं होने देंगे ,तुम हमारे भगवान का अपमान कर रहे हो ।

फिर योगी महाराज पूछते हैं क्या तुमने कभी भगवान को देखा है? फिर कहते हैं चलो इस बात का उत्तर तुम्हें नहीं मालूम तो कोई बात नहीं । नरसिंह भगवान की कहानी तो तुम ने सुनी ही होगी? वो कहां से प्रकट हुए थे।

फिर वह व्यक्ति कहता है कि नरसिंह भगवान खंभे से प्रकट हुए थे ।अब बाल योगी पूछते हैं विष्णु भगवान के 10 नाम बता सकते हो । जो व्यक्ति विरोध कर रहा था गुस्से में कहता है क्या मुझे मूर्ख समझते हो क्या मुझे इतना भी नहीं मालूम होगा क्या ?

फिर वहा व्यक्ति अपने दोस्त को इशारा करता है और उसका दोस्त विष्णु भगवान के 10 रूपों का नाम लेना शुरू कर देता है तब योगी महाराज कहते हैं । जब हम ने भगवान मछली, कछुए,  खंभे में भगवान को देखा है तो इसका मतलब है कि हर जीव में भगवान की छवि होती है।

पत्थर में भी भगवान को इंसान ढूंढ लेता है पर जीव में उसे भगवान की छवि क्यों नहीं नजर आती क्योंकि वहां जीव एक कुत्ता है।

बाल योगी कहते हैं कि हम अहंकार को त्याग कर देखो तुम्हें हर जीव में अपने गुरु की छवि नजर आएगी। वह मूर्ख व्यक्ति कहता है ऐसे तो हमे भी भगवान की छवि है तो क्यों ना हमें ही भोग लगाएं।

बाल योगी ने इशारा किया कि तुम प्रसाद खा सकते हो वह दो व्यक्ति प्रसाद खाना शुरू करते हैं फिर कुछ ही समय बाद वह चिल्लाने लगते हैं कि प्रसाद में मिर्ची है फिर baija कहती है कि यह तो पुरणपुरी है इसमें मिर्ची नहीं होती क्योंकि पूरन पूरी तो मीठी चीज है।

बाल योगी कहते हैं जो अंहकार से भरा होता है उनको हर मीठी चीज में मिर्ची मिल जाती है। वहां से बड़बड़ाते हुए अपने गुरु जिसका नाम kulkalni था। वे लोग योगी को कुलकर्णी का डर दिखाते है फिर वहां से भाग जाते हैं ।

जहां एक तरफ  योगी मानवता का संदेश दे रहे थे वहीं दूसरी ओर वैद्य कुलकर्णी अपने अंहकार में गरीबों की जिंदगी खराब कर रहा था।

अंग्रेजो के तलवे चाटने वाला है कुलकर्णी हमेशा ही अपना दबदबा शिर्डी के वासियों पर बना कर रखना चाहता था। शिर्डी में बाल योगी का सबसे बड़ा दुश्मन वैद्य कुलकर्णी ही था।

वैद्य कुलकर्णी कहने को तो न्यायाधीश था लेकिन उसने हमेशा ही गरीबों का अपमान किया था। वह हमेशा ऊंच-नीच की बातें करता था और गरीबों का अपमान करता था।

एक बार की बात है जब किसान को एक अमीर जाति के खोए से पानी लेने की आवश्यकता पड़ गई क्योंकि उसके खेत में आग लग गई थी। उसे इतना समय नहीं मिला कि वह खोए के मालिक से पूछ कर पानी ले इसलिए उसने बिना पूछे ही पानी ले लिया।

यह बात तो अमीर जाति वाले व्यक्ति को अच्छी नहीं लगी इसलिए उसने न्यायधीश के सामने अपनी समस्या बताएं।

वह अमीर जाति के व्यक्ति का नाम गंगाराम था। गंगाराम कहता है कि यह प्रथा से चल रही है गरीब अन्याय अन्याय चलाता है और अमीरों को दोषी साबित करता है। उसका कहना है कि इस दो कौड़ी के गरीब ने मेरे कुएं को दोषित कर दिया। यहां अधर्म है महाराज ।

यह शास्त्रों का निरादर है।वह किसान कहते हैं कि हमारे खेतों में आग लगी थी इसी कारण वश  हमें इनके कुएं से कुछ पानी लेना पड़ा ।हमने  कर्ज लेकर तो बीज बोए थे ।कैसे अपने खेतों का नुकसान होते देख सकते थे ?क्या हमने कोई गलती की है महाराज?

अमीर जाति का व्यक्ति कहता है कि अपना नुकसान बचाने के लिए तो अधर्म करोगे, यह कोई सही बात नहीं है।

किसान का बेटा कहता है कि हमारे छूने भर से ही क्या अधर्म हो जाएगा। किसान के पिता को मालूम था कि कुलकर्णी इस बात को अपनी सहमति कभी नहीं देगा।

इसलिए वह तुरंत ही कहता है कि मैंने मान लिया कि सारी गलती मेरी ही है ।आप चाहे जितनी मर्जी फसल मेरे खेत से ले सकते हैं पर मेरे बेटे को माफ कर दीजिए।

कुलकर्णी उस किसान की बात सुनकर कहता है कि अपराध भी तुम करो और दंड क्या होगा यह भी तुम ही तय करोगे क्या?🤔

वह किसान घबराया हुआ कहता नही-नही महाराज.. फिर कुलकर्णी ने कहा तो मैं यहां क्या सिर्फ तमाशा देखने के लिए आया हूं। कुलकर्णी कहते हैं कि समाज में किस का क्या स्थान है वह हम नहीं शास्त्र तय करते आए हैं ।

तुमने यहां एक अपराध किया है ।यह अधर्म है किसी की बावड़ी से जल लेना। अगर ऐसे ही लोग धर्म करते रहे तो कोई भी शास्त्र को नहीं मानेगा।

इसलिए तुम्हे ऐसी सजा दी जाएगी जिससे भविष्य में भी कोई तुम्हारे स्थान में हो तो ऐसा काम करने की कभी नहीं सोचेगा।

मैं हुक्म देता हूं कि आज ही इसकी खेतों में आग लगा दी जाए ।जिससे इस को सबक मिले कि इसने क्या गलती की है ?

किसान दया की भीख मांगता रहा पर कुलकर्णी वहां से चला गया। कुलकर्णी वहां से जाने ही वाला था कि उसकी 2 चमचे आए और बाल योगी के बारे में कहने लगे कि र्शिडी में काला जादू करने वाला कोई व्यक्ति आ गया है ।जो बातें तो वेदों की करता है पर बात करते-करते अल्लाह मालिक कहता है।

एक ढोंगी है जो हर एक को अपने वश में कर रहा है इतने लोग हैं जो उसके सामने माथा टेक रहे हैं मुझे तो लगता है कि वह भविष्य में शिर्डी का गुरु ही बन जाएगा।

किसान दया की भीख मांगता रहा पर कुलकर्णी ने उसकी एक न सुनी और वहां से चले गया।

वहां से निकलने के बाद जब कुलकर्णी बाल योगी के पास पहुंचा तो अपने चमचों को कहता हैं कि बच्चों के साथ निपटने के लिए भी मुझे आना पड़ेगा ।उपहास कराना चाहते हो मेरा .. तब उसका चमचा कहता है कि देखो कैसे बन रहा है कि उसे मालूम ही न हो कि आप आए हैं।

कुलकर्णी  गुस्से में उस बाल योगी को ” ऐ ढोगी ” कहकर बुलाता है ।

तब वह तपस्वी संस्कृत के श्लोक उसके सामने बोलते हैं ईश्वर ने इंसान को काफी कुछ दिया है । उसमें सुकून ढूंढने की बजाय वह और और की रट लगाए रहता है और यह उसकी इच्छा बन जाती है ।

इच्छा ना पूरा होने के कारण उसे क्रोध आने लग जाता है ।यह  क्रोध ही उसका दुश्मन है क्योंकि वहां बुद्धि को भ्रष्ट कर देता है और जहां बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है इंसान को सोचने समझने की शक्ति नहीं रहती।

पहले उसी योगी ने संस्कृत के श्लोक बोले और उसका मतलब बताया फिर उसी योगी ने मुस्लिम भाषा बोली और उसका भी मतलब लोगों को समझाया।

योगी कहते हैं कि लोगों से मुंह ना फेर ,ना ही जमीन पर इतरा  , क्यों की अंहकार करने वाले व्यक्ति को  खुदा भी प्यार नहीं करता।

कुलकर्णी योगी की बातें सुनकर कहता है कि इसे आप योगी समझ रहे हो जिसे अपने धर्म का ही नहीं मालूम।

साई किस धर्म के है? (साईनाथ तेरे हजारों हाथ अध्याय 1 )

योगी ने कहा मैं उस धर्म से हूं जो इंसान को इंसानियत समझाता है।कुलकर्णी योगी महाराज की बातें सुनकर जोर-जोर से हंसता हैं और कहते हैं ” थोथा चना बाजे घना ” अभी अपनी बोरी उठाओ और यहां से नौ दो ग्यारह हो जाओ।

इतने में baija आ जाती है और कहती है कि क्यों योगी को यहां से जाने के लिए कह रहे हो?

कुलकर्णी कहते हैं क्या अब  प्रशासनिक फैसलों में स्त्रियों का बोलना भी ? Baija कहती है प्रशासनिक निर्णय होगा आपके लिए ,मेरे लिए तो व्यक्तिगत है ।

इसने मुझे मां कहा है और मैंने भी इसे अपने बेटे के रूप में स्वीकार किया है और दुनिया में कोई भी शक्ति एक मां को अपने बेटे के पक्ष में बोलने से रोक नहीं सकती।

कुलकर्णी कहते हैं मैं समझ सकता हूं Baija तुम अभी तक मां नहीं बनी हो इसलिए तुम्हे ज्यादा प्रेम आ रहा है ।इस योगी के लिए पर  कुलकर्णी सरकार धर्म और कानून की व्यवस्था को देखने के लिए बनाई गई है ।

इसलिए कुलकर्णी सरकार के अनुसार अगर यह बालक यहां रहा तो लोगों के धार्मिक विचारों में परिवर्तन लाने की कोशिश करेगा। इसलिए इस बाल योगी को जल्द से जल्द यहां से जाना पड़ेगा।

(साई नाथ तेरे हजारों हाथ अध्याय 1) मे बताया है कि साईं नाथ शिर्डी क्यों गए?

बाल योगी कहते हैं मैं जिसकी अनुमति से यहां आया हूं उनके हुकुम से ही मैं वापस जाऊंगा। कुलकर्णी बात सुनकर कहता है कि मैं जानता था कि इस बात के पीछे जरूर कोई बड़ी साजिश है ।तुम्हारा आना जरूर कोई षड्यंत्र है। जल्दी बताओ तुम्हें यहां किसने भेजा है ?

तब योगी महाराज कहते हैं कि भेजा नहीं है बल्कि बुलाया है मेरे गुरु ने ।

कुलकर्णी गुस्से में आकर कहता है कि बताओ मुझे तुम्हारा गुरु कौन है?

योगी महाराज कहते हैं कि मेरी गुरु की समाधि शिरडी में है। समाधि का नाम सुनते ही कुलकर्णी मुस्कुराया और कहा कि मैं बचपन से यहां हूं मैंने तो कभी नहीं सुना की शिरडी में किसी की समाधि है।

कुलकर्णी कहता है कि मैंने और मेरे पूर्वज भी शिर्डी के वासी रहे हैं ।हमने तो आज तक नहीं सुना की शिरडी में किसी की समाधि है ।

तुम साबित करके बताओ कहां है तुम्हारे गुरु की समाधि ? बहुत जोर देने के बाद  योगी ने कहा कि इस स्थान पर मेरे गुरु की समाधि है ।

कुलकर्णी कहते हैं खोदो इस जगह को  मैं भी तो देखना चाहूंगा कि इस का गुरु कौन है ?

क्या  यह पाखंडी कोई पखंड कर रहा है ?कुलकर्णी कहता है कि मैं वैध हूं मुझे मालूम है कौन से रोग को कौन सी दवा काटती है और वैद्य के साथ साथ में एक न्यायाधीश भी हूं।

जल्दी बताओ कि कौन है तुम्हारा गुरु ?क्या है नाम उसका ?अपने शब्द को साबित करो ऐसा कहा कुलकर्णी ने बाल योगी को फिर बार योगी ने कहा कि यह स्थान पर है मेरे गुरु की समाधि ।

कोई भी सामने आए और जमीन पर अपना कान लगा कर सुने। फिर एक व्यक्ति आगे आया और जमीन पर जब उसने  कान लगाए तो उसे आवाज आई।

कुलकर्णी जब जमीन पर अपना कान लगाता है तो वह कहता है कि मुझे कोई ध्वनि की आवाज नहीं आई ।

चलो एक काम करते हैं इस जगह को खुद कर देखते हैं कौन है गुरु जो मौन अंदर बैठा हुआ है ?

बाल योगी के मना करने के बावजूद कुलकर्णी ने जमीन खोदने का आदेश दिया। जमीन को खोदते खोदते गांव के वासी परेशान हो गए थे। फिर योगी ने Baija के पति को कहा  कि आप खोदिए।

कुछ ही देर में baija के पति को चार दीपक दिखते हैं और यह सिद्ध हो जाता है कि बाल योगी सही कह रहे हैं।

conclusion

आशा करती हूं कि साईं बाबा तेरे हजारो हाथ का  अध्याय 1आपको समझ मे आया होगा ।अगर आपको पसंद आया हो तो शेयर , लाइक और सब्सक्राइब करना ना भूलना ।धन्यवाद🙏🏼😊

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  • dailygyankasagar

    मेरा नाम दीपा है ।मैं उड़ीसा से हूं ।मुझे किताबें पढ़ना और लोगों की मदद करना बहुत पसंद है। मेरी  रुचि हमेशा नया सीखने में और सिंगिंग में रही है। कहते हैं अगर अपने passion को profession बना लो तो जिंदगी जीने  में आनंद आने लग जाता है। यह बात मैंने किताबों से और महान व्यक्तियों से सीखी है।

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