Best parenting Tips 2023 /जिद्दी बच्चो की परविरश कैसे करे ? / How to raise successful kids ?

Best parenting Tips 2023 /जिद्दी बच्चो की परविरश कैसे करे ? / How to raise successful kids ?

Best parenting Tips 2023 /जिद्दी बच्चो की परविरश कैसे करे ? / How to raise successful kids ?

हर पेरेंट्स चाहता है कि उनके बच्चे उनकी बात माने पर अक्सर देखा गया है कि बच्चे अपने माता-पिता की बात नहीं मानते हैं ।माता पिता परवरिश में कोई कमी नहीं छोड़ते हैं लेकिन फिर भी जिद्दी बच्चों की परवरिश कैसे करें ? यहां उन्हें समझ नहीं आता ।आज इस लेख में आप  Best parenting Tips 2023 जानेंगे ।

Best parenting Tips 2023 /जिद्दी बच्चो की परविरश कैसे करे ? / How to raise successful kids ?

पेरेंट्स चाहते हैं कि वहां अच्छा लाइफस्टाइल अपने बच्चों को दें लेकिन कई बार उनकी समझाने का तरीका अलग होता है चलिए जानते हैं की परवरिश के कितने प्रकार होते हैं ?

परवरिश के कितने प्रकार होते हैं ?

  • Authoritarian parenting (सत्तावादी परवरिश शैली ) –

इसमें बच्चे के लिए सख्त कानून तय किए जाते हैं और बच्चे अपने मां बाप से बहुत कम बातचीत करते हैं ।

  • Authoritative parenting

आधिकारिक -इसमें बच्चे  के लिए नियम कानून तय किए जाते हैं ।

  • Permissive parenting (अनुज्ञेय ) –

इसमें बच्चों के लिए कड़े नियम लागू नहीं किए जाते हैं ।

  • Attachment parenting(लगाव वाली परवरिश ) –

इसमें बच्चे बहुत खुलकर अपने माता-पिता से बातचीत करते हैं और खेलते हैं ।

  • Free-range parenting.फ्री पेरेंटिंग –

इसमें माता-पिता के द्वारा बच्चों को आजादी दी जाती है ।

  • Helicopter parenting (हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग ) –

इसमें पेरेंट्स अपने बच्चों से अत्यंत प्यार करते हैं और खुद से कार्य करने नहीं देते हैं ।

  • Uninvolved/neglectful parenting (उपेक्षित) :

माता पिता अपने बच्चों की तरफ ध्यान ही नहीं देते हैं ।ऐसे माता-पिता को गैर जिम्मेदार कहा जाता है ।

पेरेंट्स अपने बच्चों का ख्याल किस तरह रख सकते हैं ?(Tips for Good parenting in hindi )

*बच्चे को हेल्दी खाना खिलाएं

*बच्चों की शारीरिक विकास पर ध्यान दें ।

*बच्चों को सकारात्मक वातावरण दे ।

*पढ़ाई के अलावा अन्य बातों की शिक्षा दें ।

*मेडिटेशन जरूर कराएं ।

* सकारात्मक विचारों की शक्ति के बारे में बताएं ।

* पढ़ाई के अलावा उन्हें अन्य कार्य में भी रुचि लेना सिखाएं ।

* खाली समय में मानसिक खेलों की सहायता से अपने बच्चे के मस्तिष्क का विकास करें ।

* आध्यात्मिक शिक्षा दें

* लोगों का आदर करना सिखाए

* तनाव से दूर रखें

* बात करने का तरीका और बड़ों का सम्मान करना सिखाए ।

* मुश्किलों से डटकर सामना करना सिखाए ।

13 Things Mentally Strong Parents Don’t Do Book Summary in Hindi

इस किताब की चर्चा जगह-जगह हो रही है क्योंकि इस किताब की लेखिका ने काफी रिसर्च के बाद मेंटली स्ट्रांग पेरेंट्स क्या कार्य नहीं करते हैं उसके बारे में जिक्र किया है ।अपने बच्चों को मेंटली और फिजिकली स्ट्रांग रखना चाहते हैं पर कई बार पेरेंट्स को समझ ही नहीं आता है कि उन्हें बच्चों को कैसे हैंडल करना चाहिए ?

कहते हैं कि घर की नींव अगर मजबूत हो तो घर मजबूत बनता है वैसे ही यदि आप बच्चों को सही दिशा में चलना बचपन में ही सिखा देंगे तो वह बड़े होकर सही मार्ग पर ही चलेंगे ।

हर पेरेंट्स पूरी कोशिश करता है कि वह अपने बच्चे को सही मार्ग पर चलना सिखा दे ।लेकिन कई बार पेरेंट्स की गलतियों के कारण बच्चे सही मार्ग पर नहीं चल पाते यदि आपको भी कोई कंफ्यूजन है कि आप अपने बच्चे को कैसे सही रास्ते पर चलाएं तो यह किताब आपके लिए ही बनी हैं ।

इस किताब की हर छोटी से छोटी बात मैं इस लेख (Best parenting Tips 2023 /जिद्दी बच्चो की परविरश कैसे करे ? )में बताने वाली हूं यदि आप जानने के लिए उत्सुक हैं कि ऐसा क्या लिखा है इस किताब में तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें ।

अब समझते हैं कि पैरेंटिंग कैसे करनी चाहिए ?

हर कोई आजकल यहां पेरेंट्स को समझा रहा है कि आप अपने बच्चों को फिजिकली फिट कैसे रख सकते हैं फिजिकल फिटनेस के अलावा मेंटली फिट रहना भी जरूरी है ।

यदि आपका बच्चा मेंटली स्ट्रांग नहीं है तो वहां भविष्य में आने वाली चुनौतियों का सामना करने में असमर्थ रह जाएगा ।

फिजिकल फिटनेस के साथ-साथ आपको अपने बच्चे को मेंटली स्ट्रांग भी बनाना है । इस किताब की ऑथर ने काफी रिसर्च और क्लाइंट्स के रिव्यु के बाद कुछ पॉइंट्स इस किताब में लिखे हैं ।

इस किताब में आप यह समझ जाएंगे कि मेंटली स्ट्रांग आप अपने बच्चों को कैसे बना सकते हैं ?सबसे पहले सवाल आपके मन में आ रहा होगा कि मेंटली स्ट्रांग क्यों बनना चाहिए ?

मेंटली स्ट्रांग इसलिए बना चाहिए क्योंकि जब भी आपके सामने कोई समस्या उत्पन्न हो तो उसे हैंडल कैसे करना है यह बात उस इंसान को मालूम होती है ।

जो इंसान मेंटली स्ट्रांग रहता है वह कोई न कोई उपाय ढूंढ कर अपनी समस्या का समाधान निकाल लेता है लेकिन जो इंसान मेंटली स्ट्रांग नहीं होते हैं वह हमेशा दुविधा में रहते हैं और कई बीमारियों से घिरे रहते हैं ।

चलिए बात करते हैं कि बच्चों को इमोशनल ही मजबूत कैसे बना सकते हैं ?

जैसे मैंने आपको पहले ही कहा है कि जितनी मजबूत घर की नींव होगी उतना ही मजबूत आपका घर बनेगा । वैसे ही जितने मजबूत आप होंगे उतना ही मजबूत आप अपने बच्चों को बना पाएंगे ।अपने अंदर बदलाव लाएं ,हेल्दी लाइफ़स्टाइल फॉलो करें,जंक फूड से दूर , व्यायाम करें ।जब आप सही मार्ग पर चल रहे होंगे तब आप अपने बच्चे की भी सही परवरिश कर पाएंगे ।

*जिम्मेदारी लेना सिखाएं

कई बार ऐसा होता है कि मां बाप अपने बच्चों की गलतियों को ढक देते हैं ऐसा करना उनकी गलती होती है आप अपने बच्चों को जिम्मेदारी लेना सिखाएं ।

उदाहरण के माध्यम से समझे एक बार अध्यापक ने बच्चे के पेरेंट्स को स्कूल में बुलाया और कहा कि यह बच्चा बहुत शांत रहता है और पढ़ाई भी अच्छे से नहीं करता है । इसके ग्रेड्स अच्छे नहीं आते हैं कहीं इसे एडीएचडी बीमारी तो नहीं ।

आमतौर पर पेरेंट्स कहते हैं कि अन्य बच्चे के मुकाबले मेरे बच्चे को कम काम दे लेकिन जो पेरेंट्स मैथिली स्ट्रांग होते हैं वह अपने बच्चों को जिम्मेदारी लेना सिखाते हैं ।उस बच्चे के पेरेंट्स मेंटली स्ट्रांग थे इसलिए उन्होंने कहा कि आप जैसे अन्य बच्चों को कार्य देते हैं इसे भी उतना ही कार्य दें ।

पेरेंट्स के डिसीजन के मुताबिक अध्यापक ने अन्य बच्चों के साथ उस बच्चे को भी उतना ही कार्य दिया । देखते ही देखते वह बच्चा अपनी जिम्मेदारी समझने लगा और उसके ग्रेड्स में भी सुधार आया ।

आप अपने बच्चे को जब अपनी जिम्मेदारी लेना सिखाओगे तो वह सीख जाएगा ।जो बच्चे अपनी जिम्मेदारी लेना नहीं सीखते हैं वह भविष्य में सिर्फ दूसरों पर इल्जाम लगाना जानते हैं इसलिए उन्हें सिखाएं कि अपनी जिम्मेदारी खुद ले ।

*डर से डटकर सामना करना सिखाए

जब बच्चा किशोरावस्था में पहुंचता है तो ज्यादातर पेरेंट्स उन्हें कंफर्ट जोन में ही रहने देते हैं जो कि गलत बात है ।

हर इंसान को कंफर्ट जॉन बहुत प्यारा लगता है यदि कंफर्ट जोन में ही बैठे रहेंगे तो आपकी जिंदगी के अगले पेज में कौन सी कहानी लिखी है वह कैसे जान पाएंगे ?इसलिए अच्छे पेरेंट्स वही हैं जो अपने बच्चों को सिखाएं की डर से डरना नहीं बल्कि डटकर सामना करना है ।

*गलत बीज ना बोना

बच्चे को पेरेंट्स एहसास दिलाते हैं कि वे best है इसमें कोई गलत बात नहीं है लेकिन उन्हें यहां भी बताएं कि आपकी काबिलियत के कारण ही आपकी तारीफ इस जग में होगी । यदि आप अपनी प्रशंसा इस जग में करवाना चाहते हैं तो खुद को काबिल बनाएं ।

कुछ पेरेंट्स अपने बच्चे को यह बताते हैं कि वह बेस्ट है सिर्फ मां बाप की नजर में बेस्ट बनने से कोई बच्चा बेस्ट नहीं बन जाता ,उन्हें बेस्ट बनाने के लिए सही विचार डालने पड़ते हैं ।

*खुद के भरोसा करना सीखाऐ –

जीवन में बच्चे के सामने कई ऐसे मोड़ आते हैं जब वह अपने आप को कमजोर समझता है ।पेरेंट्स का दायित्व है कि अपने बच्चों को यह कहा कि वे अपने आप पर भरोसा रखें । उन्हें सिखाएं कि जब कोई भी कार्य हम भरोसे से करते हैं तो तब अपना बेस्ट देने का प्रयास करते हैं इसलिए अपने आप पर भरोसा करना आना चाहिए ।

*Perfection का दबाव ना डाले

रिसर्च के मुताबिक आत्महत्या करने वालों की उम्र ज्यादातर 12 से 25 वर्ष की हो रही है । पेरेंट्स के दबाव के कारण बच्चे अपने आप को असहाय समझते हैं इसलिए पेरेंट्स को अपने बच्चों पर ज्यादा Perfection का दबाव नहीं डालना चाहिए ।

कोई कार्य करना और उस में माहिर बन्ना बहुत अच्छी बात है लेकिन एक बात पेरेंट्स को भी याद रखनी चाहिए कि कोई भी कार्य में माहिर बनने के लिए समय लगता है इसलिए ज्यादा दबाव ना डालें ।

बच्चे के दिमाग में पेरेंट्स को एक बात डालने चाहिए कि आप कर्म करना आपके हाथ में है इसलिए 100 % अपना उस कार्य में लगा दो जिस कार्य में आप आहिर बनना चाहते हो ।

*मुश्किल समय में डिमोटिवेट ना हो –

पेरेंट्स को बच्चों को समझाना चाहिए कि आपके सामने चुनौतियां आएंगी , यदि उस चुनौतियों का सामना करते हुए आप हार जाएं तो डिमोटिवेट ना हो ।

*झुठी तस्वीर बच्चों के सामने ना लगाएं –

कई बार पेरेंट्स सोचते हैं कि बच्चों को अच्छा माहौल देना चाहिए यह बात सही है लेकिन यदि आप झूठी तस्वीर बच्चों के सामने लगा रहे हैं तो इसका परिणाम गलत हो सकता है ।

उदाहरण के माध्यम से आप को समझाती हूं एक दंपति था जिनका तलाक हो चुका था लेकिन बच्चों पर बुरा असर ना पड़े इसलिए पति छुट्टी वाले दिन घर आता था और अपने परिवार के साथ समय बिताता था लेकिन एक दिन ऐसा आया कि उसकी पत्नी जीवन में आगे बढ़ना चाहती थी इसलिए उसने दूसरी शादी करने का विचार किया अब बच्चों को समझाना बहुत मुश्किल था क्योंकि उसने पहले ही झूठी तस्वीर अपने बच्चों के दिमाग में लगा रखी थी कि हम सब एक हैं ।

बच्चों के दिमाग में झूठी तस्वीर ना लगाएं क्योंकि जब सच सामने आएगा तो उन्हें बहुत पीड़ा होगी ।

बेहतर और मजबूत इंसान तब बनता है जब वह हर हालात का सामना करने के लिए तैयार होता है इसलिए अपने बच्चों को हर हालात का सामना करना सिखाए

* नेगेटिव माहौल से डील करना सिखाएं

पेरेंट्स को अपने बच्चों को सिखाना चाहिए कि जीवन में हमेशा पॉजिटिव माहौल नहीं रहता है इसलिए आपको नेगेटिव माहौल से भी Deal करना आना चाहिए ।

नेगेटिव माहौल से डील करने के लिए बच्चों को एक सपोर्ट सिस्टम का जरूरत होती है उस समय पेरेंट्स को एक दोस्त की तरह अपने बच्चे के साथ रहना चाहिए ।

*डिसिप्लिन से भविष्य सिक्योर बनता है-

पेरेंट्स को यह समझाना चाहिए कि जीवन में सफल और सही इंसान बनना कितना जरूरी है ।2 देशों के विचार एक टेबल पर बैठकर सुलझ सकते हैं तो एक परिवार के विचारों को एक जगह बैठ कर क्यों नहीं सुलझाया जा सकता ।

पेरेंट्स को अपने बच्चों को समझाना चाहिए कि किस तरह से उन्हें अपने जीवन व्यतीत करना है

पेरेंट्स को समझाना है कि डिसिप्लिन से आपका भविष्य सुहावना बन सकता है ।डिसिप्लिन से रहना एक मजबूरी नहीं है लेकिन जो व्यक्ति डिसिप्लिन को फॉलो करता है वह महान व्यक्ति बन जाता है

*शॉर्टकट ना अपनाएं –

जीवन में कई बार ऐसे मौके मिलेंगे जब आपको लगेगा कि यह रास्ता आपको अमीर और प्रसिद्ध बना सकता है लेकिन पेरेंट्स को बच्चों को समझाना चाहिए कि जो रास्ता शॉर्टकट में आपको प्रसिद्धि दे सकता है वह आपका नाम भी खराब कर सकता है इसलिए शॉर्टकट से बचे ।

*पेरेंट्स को अपने गुस्से में काबू रखना चाहिए –

बच्चे को कामयाब बनाने के चक्कर में कई बार पेरेंट्स बच्चों को ज्यादा तनाव दे देते हैं और खुद भी ले लेते हैं इसलिए पेरेंट्स को जब भी गुस्सा आए तो उन्हें अपना गुस्सा कंट्रोल करना चाहिए गुस्सा को कंट्रोल करने के लिए वे अपने दोस्तों के साथ थोड़ा टाइम स्पेंड करें और फिर अपने बच्चे को प्यार से समझाएं कि कौन सा रास्ता उनके लिए सही रहेगा ।

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Author

  • dailygyankasagar

    मेरा नाम दीपा है ।मैं उड़ीसा से हूं ।मुझे किताबें पढ़ना और लोगों की मदद करना बहुत पसंद है। मेरी  रुचि हमेशा नया सीखने में और सिंगिंग में रही है। कहते हैं अगर अपने passion को profession बना लो तो जिंदगी जीने  में आनंद आने लग जाता है। यह बात मैंने किताबों से और महान व्यक्तियों से सीखी है।

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